जिला परिवहन कार्यालय से बने लायसेंस के संबंध में मांगी थी जानकारी 

देवास। देवास जिला परिवहन अधिकारी को आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी नहीं देना महंगा पड़ गया है। अधिकारी द्वारा बार-बार गुमराह करने के चलते आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रथम अपील अधिकारी एडीएम न्यायालय की शरण ली, जहां से फैसला सुनाते हुए परिहवन अधिकारी पर 10 हजार रूपए की शास्ति अधिरोपित करते हुए तीन दिन में आवेदक को निशुल्क जानकारी देने का आदेश हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता राहुल परमार ने बताया कि उन्होंने 28 सितंबर 2018 को आवेदन देकर 1 जनवरी 2018 से आवेदन दिनांक तक बने लायसेंस के संबंध में जानकारी चाही थी। उन्हे समयअवधि में यह जानकारी जिला परिवहन कार्यालय से नहीं दी गई, जिसके चलते 18 दिसंबर को प्रथम अपील जिला परिवहन कार्यालय में की गई। इस अपील का निराकरण नहीं होने पर श्री परमार ने पुन:12 फरवरी 2019 को इसी कार्यालय में अपील की गई। लगातार अपीलों की अनदेखी होने के चलते आवेदक ने 25 फरवरी को कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर न्यायालय अपर कलेक्टर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी ने प्रकरण अवलोकन व अध्ययन किया। अपर कलेक्टर न्यायालय में दोनों पक्षों के तर्क के बाद जिला परिवहन कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी और जिला परिवहन अधिकारी का कृत्य सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के विपरित पाया गया। इस संबंध में एडीएम न्यायालय ने 10 मई 19 को फैसला देते हुए लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रूपए की शास्ति अधिरोपित की गई है। साथ ही आवेदक को मांगी गई जानकारी भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है। 

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